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The Government Has Canceled The Permission For The Bhopal Convention – Mai ki Lal

The Government Has Canceled The Permission For The Bhopal Convention – Mai ki Lal

‘माई के लालो’ से घबराई सरकार, भोपाल सम्मलेन की अनुमति रद्द की।

सवर्णो के तेज़ चल रहे आंदोलन के साथ ही ‘अखिल भारतीय संतजन परमार्थ सोसाइटी’ द्वारा एक बड़ा स्वाभिमान सम्मलेन १८ सितम्बर को भोपाल के शाहजहानी पार्क में होना तय हुआ था ।

इस सम्मलेन में साधु संतो द्वारा पूर्व से चली आ रही कुछ मांगो को लेकर शांतिपूर्वक ‘स्वाभिमान सम्मलेन’ आयोजित किया जाना था। इस कार्यक्रम की जोर शोर से चर्चायें सोशल मीडिया पर वायरल होने की खबर थी। ये देख कर शायद प्रशासन ने हाल ही में इस सम्मलेन की मंजूरी को निरस्त कर दिया है।

 

कथित सम्मलेन मे मध्यप्रदेश के जाने माने संत श्री  रामगिरि महाराज जी व आक्रामक भाषणों के लिए जाने जाते विख्यात वक्ता दीपक सारस्वत के सम्मलित होने की खबर थी, साथ ही हज़ारो की संख्या में साधु संत सम्मलित होने वाले थे।  प्रशासन द्वारा इस कार्यक्रम को निरस्त करने का वैसे तो कोई औचित्य नहीं दिखाई देता  पर आशंका इस बात की जताई जा रही है की इस फैसले से नाराज सवर्ण समाज अब कोई बड़ा क़दम उठा सकता है या ये आंदोलन कोई अलग मोड़ ले सकता है।

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The Government Has Canceled The Permission For The Bhopal Convention – Mai ki Lalo

The Government Has Canceled The Permission For The Bhopal Convention – Mai ki Lalo

‘माई के लालो’ से घबराई सरकार, भोपाल सम्मलेन की अनुमति रद्द की।

सवर्णो के तेज़ चल रहे आंदोलन के साथ ही ‘अखिल भारतीय संतजन परमार्थ सोसाइटी’ द्वारा एक बड़ा स्वाभिमान सम्मलेन १८ सितम्बर को भोपाल के शाहजहानी पार्क में होना तय हुआ था ।

इस सम्मलेन में साधु संतो द्वारा पूर्व से चली आ रही कुछ मांगो को लेकर शांतिपूर्वक ‘स्वाभिमान सम्मलेन’ आयोजित किया जाना था। इस कार्यक्रम की जोर शोर से चर्चायें सोशल मीडिया पर वायरल होने की खबर थी। ये देख कर शायद प्रशासन ने हाल ही में इस सम्मलेन की मंजूरी को निरस्त कर दिया है।

 

कथित सम्मलेन मे मध्यप्रदेश के जाने माने संत श्री  रामगिरि महाराज जी व आक्रामक भाषणों के लिए जाने जाते विख्यात वक्ता दीपक सारस्वत के सम्मलित होने की खबर थी, साथ ही हज़ारो की संख्या में साधु संत सम्मलित होने वाले थे।  प्रशासन द्वारा इस कार्यक्रम को निरस्त करने का वैसे तो कोई औचित्य नहीं दिखाई देता  पर आशंका इस बात की जताई जा रही है की इस फैसले से नाराज सवर्ण समाज अब कोई बड़ा क़दम उठा सकता है या ये आंदोलन कोई अलग मोड़ ले सकता है।

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